रविवार, 23 अगस्त 2026
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बजट 2026-27: 12.75 लाख रुपये तक की आय पर पूरी आयकर छूट, 'युवा शक्ति' पर फोकस

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार पेश किए गए आम बजट में मध्यम वर्ग को कर राहत और युवाओं के कौशल विकास पर जोर दिया।

विद्रोही आनंद डेस्क

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आम बजट पेश किया। यह लगातार नौवां मौका है जब सीतारमण ने केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया है। बजट संसद के बजट सत्र के पहले चरण में पेश किया गया, जो 28 जनवरी को शुरू हुआ था।

इस बजट को "युवा शक्ति" केंद्रित बजट के तौर पर पेश किया गया, जिसमें देश की जनसांख्यिकीय क्षमता को कौशल विकास और रोजगार से जोड़कर उत्पादक बनाने पर जोर दिया गया है। सरकार ने घरेलू विनिर्माण, तेज़ी से बढ़ते सेवा क्षेत्र और बुनियादी ढांचे को दीर्घकालिक आर्थिक विस्तार का मुख्य आधार बताया।

आयकर के मोर्चे पर सबसे बड़ी घोषणा यह रही कि 12.75 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले व्यक्तिगत करदाताओं को अब पूरी तरह आयकर छूट मिलेगी। इसके अलावा आयकर नियमों और फॉर्मों को सरल बनाने के साथ-साथ छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का भी प्रस्ताव रखा गया, जिससे करदाताओं पर अनुपालन का बोझ कम होगा और मुकदमेबाज़ी घटेगी।

युवाओं और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं के तहत बजट में "एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट" नाम से एक स्थायी समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक (एवीजीसी) क्षेत्र में वर्ष 2030 तक करीब 20 लाख पेशेवर तैयार करने के लक्ष्य के साथ इस क्षेत्र को समर्थन देने की भी घोषणा की गई।

वित्त मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2026-27 के लिए नाममात्र वृद्धि दर 10 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। कुछ दिन पहले पेश हुए आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक निजी अंतिम उपभोग व्यय की हिस्सेदारी वर्ष 2025-26 में बढ़कर 61.5 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो 2011-12 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

सरकार का कहना है कि बजट का ध्यान मध्यम वर्ग को राहत देने के साथ-साथ रोजगार सृजन और कौशल विकास पर केंद्रित है, ताकि युवाओं को बदलती अर्थव्यवस्था में बेहतर अवसर मिल सकें।

विपक्षी दलों ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए बेरोज़गारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की और मध्यम वर्ग व किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे आम नागरिकों और मध्यम वर्ग के हित में बताया।

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