सुप्रीम कोर्ट ने बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को रखा बरकरार
अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और संविधान के प्रावधानों के अनुरूप है।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मई में अपना फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति ज्योयमाल्य बागची की पीठ ने चुनाव आयोग की इस कवायद को बरकरार रखा।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया था कि इतने कम समय के भीतर चलाई गई यह पुनरीक्षण प्रक्रिया कई वास्तविक और पात्र मतदाताओं को सूची से बाहर कर सकती है। दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना था कि मतदाता सूचियों को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाए रखने के लिए ऐसी कवायद ज़रूरी है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों और संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को प्राप्त अधिकारों के अनुरूप है। पीठ ने कहा कि मतदाता सूचियों की शुद्धता बनाए रखना चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है।
हालांकि पीठ ने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से सूची से न हटे, इसके लिए पर्याप्त सावधानी बरती जाए और प्रभावित लोगों को सुनवाई का उचित मौका दिया जाए।
विपक्षी दलों और कुछ नागरिक समाज संगठनों ने फैसले के बाद भी सतर्क रुख अपनाया है और आगे भी इस प्रक्रिया की निगरानी जारी रखने की बात कही है, जबकि चुनाव आयोग ने इस फैसले को मतदाता सूचियों की शुद्धता बनाए रखने की दिशा में अदालत की मान्यता के तौर पर पेश किया है।
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