रविवार, 23 अगस्त 2026
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मुंबई क्लाइमेट वीक 2026: ग्लोबल साउथ के लिए जलवायु कार्रवाई का पहला बड़ा मंच

तीन दिवसीय आयोजन में 30 से अधिक देशों के 4,000 से ज़्यादा प्रतिनिधियों ने खाद्य प्रणाली, शहरी लचीलापन और ऊर्जा परिवर्तन जैसे विषयों पर चर्चा की।

विद्रोही आनंद डेस्क

मुंबई में 17 से 19 फरवरी तक मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 का आयोजन किया गया, जिसे ग्लोबल साउथ के लिए जलवायु कार्रवाई को समर्पित भारत के पहले मंच के तौर पर पेश किया गया। तीन दिवसीय इस आयोजन को शहर के लिए अब तक के सबसे बड़े जलवायु-केंद्रित सम्मेलनों में से एक माना जा रहा है।

इस आयोजन में सरकारों, कॉर्पोरेट कंपनियों, नागरिक समाज संगठनों, शिक्षा जगत और निवेशकों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। आयोजकों के अनुसार तीन दिनों के इस कार्यक्रम में 30 से अधिक देशों से जुड़े 4,000 से ज़्यादा लोग शामिल हुए, जिनमें नीति-निर्माता, शोधकर्ता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी शामिल थे।

कार्यक्रम में 400 से अधिक वक्ताओं ने 135 से ज़्यादा सत्रों में हिस्सा लिया, जिनमें खाद्य प्रणाली, शहरी लचीलापन और ऊर्जा परिवर्तन जैसे तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा केंद्रित रही। आयोजकों के मुताबिक इस आयोजन की कुल पहुंच करीब एक लाख 20 हज़ार लोगों तक रही।

आयोजकों का कहना है कि इस मंच का मकसद जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों पर वैश्विक दक्षिण के देशों को एक साझा मंच देना है, ताकि वे अपने अनुभव और समाधान आपस में साझा कर सकें।

मुंबई में हुए इस आयोजन को शहर के लिए जलवायु कार्रवाई पर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच के तौर पर देखा जा रहा है, जो शहर की मौजूदा जलवायु कार्ययोजना से भी जुड़ा हुआ है। कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय जलवायु संगठनों और निवेशकों ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।

विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह के आयोजन शहरी बुनियादी ढांचे, बाढ़ प्रबंधन और ऊर्जा दक्षता जैसे क्षेत्रों में नीति निर्माण के लिए ज़रूरी अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश जुटाने में मदद कर सकते हैं।

आयोजकों ने कहा कि आने वाले वर्षों में इस आयोजन को सालाना कार्यक्रम के तौर पर जारी रखने की योजना है, ताकि मुंबई जैसे तटीय महानगरों के सामने जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों पर निरंतर चर्चा हो सके।

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