पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत, तृणमूल कांग्रेस का 15 साल का शासन समाप्त
राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत मिला, सुवेंदु अधिकारी को अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने की तैयारी।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए गए, जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत के आंकड़े से कहीं अधिक सीटें जीतकर राज्य में सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया। अंतिम आंकड़ों के मुताबिक पार्टी को 208 सीटें मिलीं, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस महज 80 सीटों पर सिमट गई। कुछ सीटों पर पुनर्मतगणना और एक निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान के चलते पूर्ण परिणाम 24 मई को सामने आए।
इस नतीजे के साथ ही राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल पुराने शासन का अंत हो गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कोलकाता की भबानीपुर सीट से चुनाव लड़ रही थीं और मतगणना के दौरान लंबे समय तक पीछे चलती रहीं। उन्होंने कई मतगणना केंद्रों का दौरा कर गड़बड़ी और बिजली कटौती की शिकायत दर्ज कराई, हालांकि निर्वाचन आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
भाजपा विधायक दल के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी को अगला मुख्यमंत्री बनाया जाना तय हुआ है। वहीं वाम मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन को क्रमशः चार और दो सीटें मिलीं, जिससे दोनों दल एक बार फिर विधानसभा में प्रतिनिधित्व हासिल करने में कामयाब रहे, जबकि पिछली विधानसभा में इनकी मौजूदगी लगभग न के बराबर थी।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार इस चुनाव में मतदान प्रतिशत रिकॉर्ड स्तर पर रहा, जिसे भारत में किसी विधानसभा या लोकसभा चुनाव के लिए अब तक का सबसे अधिक मतदान बताया गया। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नागरिकता संशोधन कानून, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुखता से छाए रहे, खासकर 2024 के आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले के बाद से यह मुद्दा राज्य की राजनीति में लगातार गूंजता रहा था।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह नतीजा पूर्वी भारत की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है, जहां भाजपा दशक भर की कोशिशों के बाद पहली बार राज्य की सत्ता तक पहुंचने में सफल रही। आने वाले दिनों में नई सरकार के गठन और मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी सरगर्मी बनी रहने की उम्मीद जताई जा रही है।