सुप्रीम कोर्ट ने 1988 के हत्या मामले में बरी किए जाने के फैसले को बहाल किया
अदालत ने कहा कि सिर्फ हथियार की बरामदगी अपराध और आरोपी के बीच स्पष्ट संबंध साबित किए बगैर दोषसिद्धि का आधार नहीं बन सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने 1988 के एक पुराने हत्या मामले में निचली अदालत द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को बहाल कर दिया है। कोर्ट का यह फैसला 28 जुलाई को आया।
मामले में बाद की कार्यवाही में आरोपी को दोषी ठहराया गया था, जिसके खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी हथियार की बरामदगी, भले ही उस पर मानव रक्त के निशान मिले हों, अपने आप में दोषसिद्धि का आधार नहीं बन सकती, जब तक अभियोजन पक्ष बरामद हथियार, अपराध और आरोपी के बीच स्पष्ट और सीधा संबंध साबित न करे।
अदालत ने कहा कि सबूतों की कड़ी में इस तरह के अंतर होने पर संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाना चाहिए, और इसी सिद्धांत के आधार पर मूल रूप से बरी किए जाने के फैसले को सही ठहराया गया।
यह फैसला उन कई फैसलों में से एक है जो सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में सुनाए, जिनमें सबूत के मानकों और आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि के आधारों को लेकर अदालत ने अपनी स्थिति स्पष्ट की।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला आपराधिक मामलों में परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आकलन के लिए एक महत्वपूर्ण नज़ीर के तौर पर देखा जाएगा।